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जानिये क्या होता है ब्लॉकचैन टेक्नोलॉजी ? कैसे ये काम करती है जानिये पूरी तकनीक !!

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आजकल हर कोई एक ही बात कर रहा है ब्लॉकचैन? आखिर क्या है ये ब्लॉकचैन ? पिछले कुछ में ब्लॉकचैन वर्ड बहुत फेमस हुआ है । हर कोई इस नई टेक्नोलॉजी में बेहद दिलचस्पी रखता है । यह टेक्नोलॉजी सतोषि नकामोटो के द्वारा लाई गई है । ब्लॉकचैन एक ऐसा नेटवर्क है जिसको काममे लेकर इनफार्मेशन बाटी जा सकती है । वैसे तो ये बहुत जगह काम मे आती है लेकिन इसका सबसे बेहतरीन use बिटकॉइन ने किया है। हालांकि और भी लोग इसको काम में ले रहे है । अब आप बिटकॉइन के बारे में नही जानते तो उसके बारे में भी हम आपको बताएंगे दरसल ये एक प्राइवेट करेंसी है जिसको कोई ऑपरेट नही करता लेकिन इसकी कीमत अमेरिकन मार्केट के हिसाब से चलती है । पिछले कुछ वक्त से इसकी कीमत सोने से भी ज्यादा पहुंच गई सोना तो इसके आगे कुछ नही है । इसकी किमत 5000$ तक गयी थी ।
अब जो हमारा ब्लॉकचैन है वो तीन चीज़ों की मिलकर काम करता है
Private Key Cryptography, P2P Network, and the protocol . ये इतना सिक्योर होता है कि हैकर इसको चाह के भी हैक नही कर सकता। इसमें होस्टिंग नही होती इसमे peer तो peer सिस्टम वर्क करता है । यानी एक क्लाइंट होता है और दूसरा कंप्यूटर होस्ट इसमे ऑनलाइन डेटा स्टोर नही होता । ब्लॉकचैन में एक ही डेटाबेस बहुत सारे पार्ट्स में बांट दिया जाता है उसके बाद उसे अलग अलग होस्ट में डालकर एक्सेस किया जाता है ।

Private Key Cryptography

अब जो भी लोग ब्लॉकचैन काम मे ले रहे है उनको 2 key दी जाती है एक प्राइवेट key और दूसरी पब्लिक key जिसको मिलाकर कोई भी इंसान डिजिटल sign कर सकता है । अब चूँकि जो सिस्टम है वो किसी एक होस्ट पर बेस्ड नही है तो इसमें सिक्यूरिटी भी ज्यादा है ।

P2P NETWORK

जैसा की हमने आपको बताया की जो सिस्टम है वो किसी एक होस्ट पर बेस्ड नही है तो अब किसी को अगर लेन देन करना है तो उसको खुदकी प्राइवेट की काममे लेनी होगी इसके लिए एक प्रोटोकॉल होता है जो प्राइवेट की को स्टोर करता है ।

PROTOCOL

अब ब्लाक चैन क्यों की बहुत सारे कंप्यूटर में डाटा स्टोर करता है तो इसको काम में लेने के लिए बहुत सारी एनर्जी भी चाहिए होती है अब इस काम को हम माइनिंग कहते है । माइनिंग के अंदर हमें रिवॉर्ड के तौर पर कोई भी क्रिप्टो मिल जाती है लेकिन आपको बतादे माइनिंग के अंदर बहुत ज्यादा एनर्जी लगती है और ये छोटे पॉवर वाले कंप्यूटर के लिए तो बिलकुल भी सेफ नही है । अब को प्रोटोकॉल होता है वो हर लेन देन पर नज़र रखता है की सब लेन देन पर स्टाम्प लग रहा है या नही , इसकी जिमेदारी होती है की लेन देन में कोई परेशानी ना हो ।

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