फोन आया – अबू सलेम गुलशन कुमार का विकेट लेगा, फिर 16 गोली मार कर कैसेट किंग की मंदिर में हत्या !

अंडरवर्ल्ड से सिनेमा का यादगार और दर्दनाक किस्सा रहा है गुलशन कुमार के साथ। टी सीरीज को खड़ा करने वाले गुलशन कुमार की जिंदगी में जूस बेचने से लेकर कैसेट के जरिए करोड़ों की कमाई करने का इतिहास है। लेकिन उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा सच उनकी मौत रही है। 5 मई 1951 को उनका दिल्ली के पंजाबी परिवार में जन्म हुआ।

संघर्ष करते हुए उन्होंने बिना किसी पहचान के 1970 से अपने कैसेट बेचने के कारोबार को इतनी तेजी से फैलाया कि 90 तक हर घर में केवल गुलशन कुमार दिखाई देते थे। टी-सीरीज के जरिए सिर्फ फिल्मों में नहीं बल्कि माता के भजन और गीत को लेकर हर गरीब से अमीर घर में कम दाम पर उन्होंने कैसेट बेचना शुरू कर दिया।

40 से 50 की कीमत पर वह अपने कैसेट बेचते थे। कमाई करोड़ों की। उनकी पहली फिल्म 1989 में लाल दुपट्टा मलमल का रिलीज हुई। इसका संगीत लोकप्रिय हो गया। साल 1990 में रिलीज आशिकी और आमिर खान की 1991 में रिलीज दिल है की मानता नहीं ने संगीत की दुनिया में हलचल पैदा कर दिया। लेकिन एक काला दिन आया। 12 अगस्त,1997 जब दाऊद और अबू सलेम ने गुलशन कुमार की हत्या की प्लानिंग की।

जूस बेचने से की शुरुआत फिर बन गए कैसेट्स किंग

गुलशन कुमार के पिता दिल्ली के दरियागंज में जूस बेचने के काम करते थे। उसी ठेले से कैसेट्स और रिकॅार्डस बेचने की शुरुआत की। गुलशन कुमार पहले ऐसे संगीतकार रहे हैं जिन्होंने घर-घर में संगीत को कैसेट्स के जरिए पहुंचाया था। इसलिए उनका नाम कैसेट किंग पड़ गया था।

80 से 90 दशक में की करोड़ों की कमाई

गुलशन कुमार ने फिल्म से एक शुरुआत की इसके बाद देवी मां की भक्ति में लीन हो गए। हिंदू पौराणिक कथाओं के भजन, गीत और कहानी से जुड़े उनके कैसेट्स मार्केट में धूम मचा रहे थे। उन्होंने टी सीरीज को आसमान तक पहुंचा दिया। करोड़ों के मालिक बन गए लेकिन देवी और शिव भक्ति में उनका ध्यान हमेशा रहा।

अबु सलेम ने मांगा 10 करोड़ गुलशन कुमार का इंकार


उन दिनों अंडरवर्ल्ड खुले आम स्टार्स और निर्माताओं से पैसे की मांग करता था। पत्रकार हुसैन जैदी ने अपनी किताब माय नेम इज अबू सलेम में एक किस्सा शेयर करते हुए बताया है कि कैसे गुलशन कुमार से 10 करोड़ की फिरौती मांगी गई। उन्होंने अबू सलेम से फोन पर साफ कह दिया कि इतने रुपए देकर मैं वैष्णो देवी का भंडारा करवा दूंगा।

मुझे फोन पर कहा गया कि गुलशन कुमार का विकेट गिरने वाला है

इसी के बाद से उन्हें मारने की योजना बनाई गई। महाराष्ट के पूर्व डीजीपी राकेश मारिया ने एक इंटरव्यू में इसका जिक्र करते हुए कहा था कि 12 अप्रैल 1997 को मुझे खबरी का फोन आया। बस इतना कहा गया कि सर, गुलशन कुमार का विकेट गिरने वाला है। मेरे पूछने पर बताया गया कि अबू सलेम विकेट लेने वाला है। गुलशन कुमार एक शिव मंदिर में जाता है, वहीं पर उसका काम खत्म होने वाला है।

पूजा करके निकले उनकी पीठ पर बंदूक की नाल महसूस हुई

इंडिया टुडे की स्टोरी अनुसार 42 साल की उम्र में गुलशन कुमार का निधन हुआ। वह हाथ में पूजा का सामान लेकर माला जपते हुए मंदिर की तरफ से आ रहे थे। ये मंदिर गुलशन कुमार के घर से एक किलोमीटर की दूरी पर है। जैसे ही पूजा करके निकले उनकी पीठ पर बंदूक की नाल महसूस हुई। पलट कर उन्होंने देखा तो एक आदमी बंदूक लेकर खड़ा था।

गुलशन कुमार पर तुरंत 16 राउंड फायरिंग

गुलशन कुमार पर तुरंत 16 राउंड फायरिंग की गई। उनकी गर्दन और पीठ पर 16 गोलियां लगी थीं। उनके ड्राइवर ने मालिक को बचाने की कोशिश की। लेकिन उसके पैर पर भी गोली मारी गई। इसी तरह अंधेरी के जीतेश्नवर मंदिर में उनकी हत्या कर दी गई।

दाऊद और सलीम को पैसे देकर करवाई गई हत्या

बता दे कि मुंबई पुलिस ने इस मामले को लेकर अभियुक्त नदीम को बनाया था। हत्या का आरोप फिल्म संगीतकार नदीम सैफी पर भी लगा था। कहा जाता है कि निजी दुश्मनी की वजह से दाऊद और अबू सलेम को पैसे देकर ये हत्या करवाई गई है। हालांकि पुलिस नदीम पर हत्या का आरोप साबित नहीं कर पाई।

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