भारत ने हेलीकॉप्टर की मदद से बनाई सड़क! अब बहुत जल्दी पहुंच सकेंगे चीन में स्थित मानसरोवर

भारत ने अमेरिका से मिले चिनूक हेलीकॉप्टर की मदद से भारत और चीन सीमा पर एक बहुत ही महत्वपूर्ण सड़क बनाने में कामयाबी हासिल की है। इसको लेकर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक ट्वीट में इस परियोजना से जुड़ी तस्वीरों को साझा किया है। गडकरी ने कहा, ‘बीआरओ को कैलास मानसरोवर मार्ग को लिपुलेख दर्रे से जोड़ने के लिए बधाई। यह दर्रा 17,060 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।’

गडकरी ने कहा कि पहली बार सीमावर्ती गांवों को सड़क मार्ग से जोड़ा जा रहा है और कैलास मानसरोवर के यात्रियों को 90 किमी का पैदल रास्ता तय नहीं करना पड़ेगा। वे गाड़ियों से चीन सीमा तक जा सकते हैं। साथ में उन्होंने इस प्रोजेक्ट की कुछ तस्वीरें भी साझा की। इसमें एक तस्वीर में चिनूक हेलीकॉप्टर को गूंजी तक मशीनरी ले जाते हुए दिखाया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इन लिंक रोड का उद्घाटन किया।

2015 में भारत के 15 चिनूक हेलिकॉप्टर्स खरीदने के लिए अमेरिका के साथ करार किया था। चार हेलिकॉप्टरों की पहली खेप पिछले साल फरवरी में भारत को मिली थी। यह हेलिकॉप्टर किसी भी मौसम में सेना की टुकड़ियों और साजोसामान को दुर्गम और ऊंचे इलाकों में पहुंचा सकता है। इसकी खूबी यह है कि इसे छोटे हेलीपैड और संकरी घाटियों में भी उतारा जा सकता है। यह तेजी से उड़ान भरने में सक्षम है और बेहद घनी पहाड़ियों में भी बखूबी अपना काम करता है। चिनूक में दो रोटर इंजन लगे हैं जो इसे बेहद शक्तिशाली बनाता है। यह 11 टन तक भार उठाने में सक्षम है।

सैन्य के साथ-साथ इसका असैन्य गतिविधियों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। पहाड़ी राज्यों में दुर्गम और ऊंचाई वाले इलाकों में इसके जरिए आसानी से साजोसामान पहुंचाया जा सकता है। खासकर दुर्गम इलाकों में सड़क निर्माण की परियोजनाओं में यह काफी मददगार साबित हो सकता है।

चिनूक के भारतीय एयरफोर्स के बेड़े में शामिल होने से न केवल सेना की क्षमता बढ़ी है बल्कि कठिन रास्ते और बॉर्डर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को बनाने में भी इसका अहम योगदान रह सकता है। नॉर्थ ईस्ट में कई रोड प्रोजेक्ट सालों से अटके पड़े हैं और उन्हें पूरा करने के लिए बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन लंबे समय से एक हैवी लिफ्ट चॉपर का इंतजार कर रहा था। इससे इन घनी घाटियों में सामग्री और जरूरी मशीनों को पहुंचाया जा सकता है। अमेरिकी सेना पहाड़ी क्षेत्रों में ऑपरेशन के लिए इन्हें इस्तेमाल करती है। साथ ही आपदा राहत अभियानों में भी यह अपना काम अच्छी तरह करता है।

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