हंदवाड़ा में शहीद कर्नल की कहानी, 12 बार फेल हुए तब 13वीं बार मिली नौकरी

जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में शहीद हुए कर्नल आशुतोष शर्मा की कहानी दिल को छू लेने वाली है। यह सेना के प्रति उनका लगाव था, कि 12 बार फेल होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और 13वीं बार आर्मी ज्वॉइन कर ली। आइए इस शहीद को याद करते हुए पढि़ए उसकी कहानी।

नई दिल्ली (पीटीआई)। आतंकियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए कर्नल आशुतोष शर्मा को भारतीय सेना से काफी लगाव था। साढ़े छह साल तक कर्नल आशुतोष शर्मा ने सेना में शामिल होने के 12 असफल प्रयास किए। फिर जब 13वीं बार किस्मत आजमाई तो उनका सलेक्शन हो गया और उन्हें सेना की वर्दी मिली। इसी वर्दी को पहने-पहने वह देश के लिए शहीद हो गए। शनिवार देर रात उत्तरी कश्मीर में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए पांच सुरक्षा बलों के जवानों में शामिल कर्नल शर्मा 21 राष्ट्रीय राइफल्स के दूसरे कमांडिंग ऑफिसर हैं जिन्होंने आतंकवाद विरोधी अभियान में अपनी जान गंवा दी।

अफसल होने के बाद नहीं मारी हार

कर्नल शर्मा को याद करते हुए, उनके बड़े भाई पीयूष कहते हैं कि वह हमेशा अपने रास्ते खुद बनाते थे। पीयूष जयपुर में एक फार्मास्युटिकल कंपनी में काम करते हैं। आज जब उनका भाई वतन के लिए शहीद हो गया तब उन्हें कर्नल शर्मा से जुड़ी सारी यादें आ रही। वह कहते हैं, ‘उनका एकमात्र सपना आर्मी था और कुछ नहीं।” पीयूष ने फोन पर पीटीआई से कहा, “कर्नल शर्मा ने सेना में भर्ती होने के लिए 12 बार प्रयास किए। मगर वह हर बार असफल हो जाते थे, फिर आखिर में उन्होंने 13वीं बार कोशिश की और सफल हुए फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।’

आखिरी बात को याद कर इमोशनल हुए भाई

कर्नल शर्मा 2000 के दशक की शुरुआत में सेना में शामिल हुए थे। अपने से तीन साल छोटे भाई को याद करते हुए पीयूष कहते हैं, ‘हमारी बात राष्ट्रीय राइफल्स के स्थापना दिवस पर हुई थी। उन्होंने हमें सूचित किया कि कैसे कोविड-19 महामारी के बीच जवानों ने इसे सेलीब्रेट किया। मैं उन्हें कई बार सावधान करता था मगर उनके पास बस एक उत्तर रहता था ‘मुझे कुछ नहीं होगा, भैया।’ कर्नल शर्मा ने कुछ तस्वीरें भेजी थीं। अब परिवार के लिए यह उनकी आखिरी याद है।

दोस्त ने भी यादें की शेयर

कर्नल शर्मा के दोस्त विजय कुमार, जो सीआईएसएफ में डिप्टी कमांडेंट हैं। वह कहते हैं, ‘मैंने उन्हें कई बार कहा था कि वो सेना के पीछे क्यों पड़े हैं, अर्धसैनिक बल में नौकरी के लिए प्रयत्न क्यों नहीं करते। लेकिन उनके लिए इंडियन आर्मी से बढ़कर कुछ नहीं होता था। वह सिर्फ और सिर्फ सेना में आना चाहते थे।’ विजय कुमार ने आगे बताया कि, ‘उनकी कार्यप्रणाली हमेशा बेहतरीन रही और जब हम बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश) में रहते थे तो मैंने कभी किसी को उनके खिलाफ कोई शिकायत करते नहीं देखा। कर्नल शर्मा की बेटी तमन्ना, जो कक्षा छह में पढ़ती हैै। उसे दुलारते हुए पीयूष ने कहा कि वह अभी तक समझ नहीं पाई है कि रात भर में कितना कुछ बदल गया लेकिन, वह एक बहादुर पिता की बहादुर बेटी है।

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